प्रबोधक
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वरिष्ठ शोध अध्येता
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् ,नई दिल्ली
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पूर्व आचार्य
डॉ. अंबेडकर पीठ ,विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन
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अध्यक्ष
सार्वभौम मानव विकास संस्थान, उज्जैन
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समाजशास्त्री टिप्पणीकार
संक्षिप्त जीवन परिचय
आचार्य शैलेंद्र पाराशर के ‘व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ का फलक बहुआयामी है ।आपने एक मेधावी विद्यार्थी के रूप में एलएल-बी. एम. फिल्.(समाजविज्ञान )पीएच.डी. (समाजशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र) उपाधियाँ प्राप्त की हैं।ः
आपके पास अध्ययन -अध्यापन,शोध,प्रबोधन एवं नवाचारों का पाँच दशकों से अधिक का अनुभव है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सौजन्य से आपके शोध ग्रंथ ‘उच्च शिक्षा में शिक्षकों के बदलते मूल्य’ वर्ष 2010 एवं ‘ग्राम प्रजातंत्र के सामाजिक- राजनीतिक अन्त:संबंध में परिवर्तन ( 73वें संविधान संशोधन के विशेष संदर्भ में) वर्ष 2017, प्रकाशित हैं.
आप विक्रम विश्वविद्यालय,उज्जैन की डॉ. अंबेडकर पीठ (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय,नई दिल्ली) के चेयर प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुये हैं।
वर्तमान में आपका समाज वैज्ञानिक के रूप में शोध कार्य निरंतर जारी है। आपको ICSSR, नई दिल्ली द्वारा वरिष्ठ शोध फेलो के रूप में कार्यरत हैं।
वर्तमान में सार्वभौम मानव विकास संस्थान, उज्जैन के अध्यक्ष हैं। आपको पांच दशकों का अध्यापन अनुभव है जिसने अनेक पीढ़ियों के भविष्य को संभालने में भूमिका निभाई है ।आपका अध्ययन, अध्यापन, लेखन एवं प्रबोधन देने का सिलसिला निरंतर जारी है।
आप एक समाजशास्त्री, शोध अध्येता, समालोचक, समाज वैज्ञानिक,उद्घोषक ,लेखक एवं अभिप्रेरक वक्ता हैं। उज्जैन के अमृत प्रसंग ‘सिंहस्थ’ में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में लेखन,संयोजन,उद्घघोषणा,सर्वक्षण, साक्षात्कार, एवं समाजसेवा से संबद्ध रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित सौ से अधिक लघु वृत्त चित्रों का लेखन कर आवाज़ दी है. आपकी वार्ता एवं उद्घोषणा आकाशवाणी एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रसारित हुई है ।आपने सौ से अधिक विभिन्न विषयों पर शिक्षकों,धर्माचार्यों अध्यात्मवेत्ता, विद्वानों,लेखकों,चिकित्सकों एवं शिक्षाविदों के साक्षात्कार लिए हैं, उनका यह सिलसिला निरंतर जारी है। आपकी अभिरुचि भारतीय सामाजिक ,सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विषयों के अध्ययन,शोध एवं लेखन में है।आपने अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं, प्रतिष्ठानों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभिन्न विषयों पर सैकड़ों व्याख्यान देकर हजारों विद्यार्थियों एवं श्रोताओं को लाभान्वित किया है।
अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपके विविध विषयों पर अनेक आलेख, समीक्षा,कविता, व्यंग्य रचनाएँ एवं चिन्तन प्रकाशित हैं। आपके शोध जर्नलों में शोध-पत्र एवं 6 पुस्तकें प्रकाशित हैं। आपने मोनोग्राफ शोध परियोजना एवं शो सर्वेक्षण कार्य किए हैं
आपके निर्देशन में साठ से अधिक शोधार्थियों ने शोध प्रबंध प्रस्तुत कर एम.ए. ,एम.फिल्. एम.एस.डब्ल्यू. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की है। आपके अनेक शोध पत्र शोध जर्नल में प्रकाशित हुए हैं ।वहीं आप अनेक पुस्तकों एवं स्मारिकाओं के संपादक एवं संपादक मंडल के सदस्य रहे हैं। आपने अनेक अंतर्राष्ट्रीय,राष्ट्रीय एवं स्थानीय संगोष्ठियों में सहभागिता की है।
एक समाजविज्ञानी के रूप में समय -समय पर देश एवं विदेश की यात्राएं कर अपने अनुभवों को समृद्ध करते रहें हैं।
आपको राष्ट्रीय,प्रादेशिक एवं स्थानीय संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित, अभिनंदित एवं अंलकृत किया गया है।